भोपाल में न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने BJP कार्यालय में धरना दिया।
भोपाल में कम मानदेय पर काम कर रहे अस्थायी और आउटसोर्स कर्मचारियों ने सोमवार को प्रदर्शन किया।कर्मचारी न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) की मांग लेकर भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचे।
कर्मचारियों ने कार्यालय परिसर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना दिया।इस दौरान कर्मचारियों ने नारेबाजी भी की।
यह आंदोलन ‘न्यूनतम वेतन दिलाओ उपवास आंदोलन’ के नाम से किया जा रहा है।आंदोलन की पूर्व सूचना भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र के जरिए दी गई थी।
3 से 8 हजार रुपये में काम करने का दावा
अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने वेतन को लेकर दावा किया।उनके मुताबिक, कई कर्मचारी बेहद कम मानदेय पर काम कर रहे हैं।
शर्मा का कहना है कि कुछ कर्मचारियों को महीने में सिर्फ 2 से 3 हजार रुपये मिलते हैं।वहीं कई कर्मचारियों का मानदेय 4 से 8 हजार रुपये के बीच बताया गया है।
मध्य प्रदेश में घोषित न्यूनतम मजदूरी कितनी है?
मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक संशोधित न्यूनतम मजदूरी लागू है।श्रमिकों की श्रेणी के अनुसार यह राशि अलग-अलग निर्धारित है।
श्रेणी मासिक न्यूनतम मजदूरी
अकुशल ₹12,425
अर्द्धकुशल ₹13,421
कुशल ₹15,144
उच्चकुशल ₹16,769
इन दरों में ₹2,850 का परिवर्तनीय महंगाई भत्ता शामिल है।
> ध्यान दें: ये सामान्य निर्धारित न्यूनतम मजदूरी की दरें हैं। किसी कर्मचारी पर कौन-सी दर लागू होगी, यह उसके रोजगार और कौशल वर्ग पर निर्भर करता है।
अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों की क्या स्थिति?
कर्मचारी संगठन ने अलग-अलग विभागों में कम मानदेय पर काम करने का दावा किया है।उनके अनुसार स्कूलों, छात्रावासों और पंचायतों में बड़ी संख्या में कर्मचारी प्रभावित हैं।

कर्मचारियों द्वारा बताए गए मानदेय
स्कूल और छात्रावास कर्मचारी: ₹4 से ₹5 हजार प्रतिमाह।
ग्राम पंचायत कर्मचारी: ₹3 से ₹4 हजार प्रतिमाह।
स्वास्थ्य विभाग आउटसोर्स कर्मचारी: ₹7 से ₹8 हजार प्रतिमाह।
लोकल यूथ सर्वेयर: करीब ₹1 हजार प्रतिमाह।
पेसा मोबिलाइजर: करीब ₹4 हजार प्रतिमाह।
कोटवार: ₹2 से ₹5 हजार प्रतिमाह।
मध्याह्न भोजन कार्यकर्ता: करीब ₹4 हजार प्रतिमाह।
योग सहायक और प्रशिक्षक: करीब ₹4,500 प्रतिमाह।
मनरेगा मेट: ₹2 हजार से कम मानदेय का दावा।
ये आंकड़े कर्मचारी संगठन की ओर से बताए गए हैं। इन सभी पदों की भुगतान व्यवस्था और लागू नियम अलग-अलग हो सकते हैं।
2003 की घोषणा याद दिलाने पहुंचे कर्मचारी
कर्मचारी संगठन ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भी भेजा है।
पत्र में वर्ष 2003 की एक घोषणा का हवाला दिया गया है।
संगठन का कहना है कि लंबे समय से काम करने वाले कर्मचारियों को स्थायी रोजगार मिलना चाहिए।साथ ही उन्हें सम्मानजनक वेतन और सेवा सुरक्षा देने की मांग की गई है।
वासुदेव शर्मा के मुताबिक, आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि पिछले वर्षों में अस्थायी व्यवस्था बढ़ी है।पत्र में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
किन कर्मचारियों की भागीदारी?
आंदोलन में कई विभागों के कर्मचारी शामिल होने की बात कही गई है।इनमें ग्राम पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर और सफाईकर्मी शामिल हैं।इसके अलावा भृत्य, स्कूल और छात्रावास कर्मचारी भी आंदोलन से जुड़े हैं।आउटसोर्स और अंशकालीन कर्मचारियों की भागीदारी भी बताई गई है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारी संगठन की मांगों में न्यूनतम वेतन का भुगतान प्रमुख है।इसके साथ स्थायी रोजगार और सेवा सुरक्षा की मांग भी उठाई गई है।
कर्मचारी चाहते हैं कि लंबे समय से काम कर रहे लोगों के मानदेय में सुधार हो।संगठन ने सरकारी विभागों में काम करने वालों की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं।
आंदोलन से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि कम मानदेय में परिवार चलाना मुश्किल है।उनका कहना है कि सरकार को इस मामले में ठोस निर्णय लेना चाहिए।
आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात
कर्मचारी संगठनों ने भोपाल में प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया था।
रिपोर्टों के मुताबिक 28 और 29 सितंबर को प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी।
फिलहाल कर्मचारियों की मांगों पर सरकार की ओर से किसी अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं है।आंदोलनकारी कर्मचारी न्यूनतम वेतन और सेवा संबंधी मांगों पर कार्रवाई चाहते हैं।
