कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्वीकार किया कि कनाडा अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा निर्भर है। कार्नी के मुताबिक, इस निर्भरता को अब कम करना जरूरी है। इसके लिए कनाडा घरेलू ताकत बढ़ाने पर जोर देगा। साथ ही वह दुनिया के दूसरे देशों से रिश्ते मजबूत करेगा।
कार्नी ने यह बात जर्मन मीडिया संस्थान डीडब्ल्यू को दिए इंटरव्यू में कही। यह बातचीत शुक्रवार को मॉन्ट्रियल में हुई थी। इससे पहले उन्होंने यूरोपीय संघ के नेताओं से मुलाकात की थी। बैठक में कनाडा और यूरोप के बीच नए सहयोग पर चर्चा हुई। कार्नी ने कहा कि कनाडा अपनी साझेदारियां विविध और मजबूत बनाना चाहता है।
उन्होंने साफ किया कि अमेरिका से रिश्ते खत्म करना कनाडा का मकसद नहीं है। अमेरिका कनाडा का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के पुराने संबंध हैं। दोनों देश नाटो के भी सहयोगी हैं। हालांकि, कार्नी अब यूरोप के साथ सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं।

यूरोपीय संघ के साथ करीबी साझेदारी चाहता है कनाडा
मॉन्ट्रियल में यूरोपीय संघ का प्रतिनिधिमंडल कार्नी से मिला था। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने किया। उनके साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी मौजूद थे। बातचीत में कनाडा और यूरोपीय संघ के भविष्य के संबंधों पर चर्चा हुई।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष ने कनाडा को विशेष साझेदारी का प्रस्ताव दिया है। इसे ‘एसोसिएट सदस्यता’ यानी सहयोगी सदस्यता नाम दिया जा रहा है। यह पूर्ण सदस्यता से अलग व्यवस्था होगी। कनाडा भौगोलिक रूप से यूरोप का हिस्सा नहीं है। इसलिए वह यूरोपीय संघ का पूर्ण सदस्य नहीं बन सकता।
कार्नी ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण साझेदारी का वास्तविक लाभ है। उनके अनुसार, इसका मतलब यूरोपीय संघ से बेहद करीबी संबंध होगा। हालांकि, कनाडा को पूर्ण सदस्यता का दर्जा नहीं मिलेगा।
इस प्रस्ताव को लेकर यूरोप के भीतर सहमति नहीं है। जर्मनी सहित कुछ देशों ने इस नाम पर आपत्ति जताई है। यूरोपीय संघ के मौजूदा नियमों में ऐसी सदस्यता का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसलिए इस व्यवस्था का स्वरूप अभी तय होना बाकी है। दोनों पक्ष अगले साल तक इसके दायरे पर काम करेंगे।

अमेरिका को बाहर करने की कोई योजना नहीं
कार्नी से पूछा गया कि क्या वे अमेरिका के बिना नया गुट बनाना चाहते हैं। इस पर उन्होंने ऐसी किसी मंशा से इनकार किया। उन्होंने कहा कि कनाडा अमेरिका के साथ सहयोग जारी रखना चाहता है। लेकिन दूसरे साझेदारों के साथ संबंध भी मजबूत किए जाएंगे।
कार्नी के मुताबिक, कई क्षेत्रों में यूरोप के साथ सहयोग ज्यादा गहरा हो सकता है। उन्होंने कनाडा और यूरोपीय संघ के मौजूदा व्यापार समझौते का भी जिक्र किया। यह व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता यानी सीईटीए कहलाता है। कार्नी ने इसे दुनिया के सफल मुक्त व्यापार समझौतों में शामिल बताया।
उन्होंने भविष्य में सहयोग के कई नए क्षेत्र भी गिनाए। इनमें अंतरिक्ष तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और महत्वपूर्ण खनिज शामिल हैं। ऊर्जा, सुरक्षा और शोध के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ सकती है। दोनों पक्ष तकनीक और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना चाहते हैं।

ट्रंप के साथ तनाव के बीच बढ़ रही नजदीकी
कार्नी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिश्तों में तनाव रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और शुल्क को लेकर मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कनाडाई उत्पादों पर कई शुल्क लगाए हैं। कनाडा ने इन कदमों पर आपत्ति जताई है।
कार्नी ने कहा कि अमेरिका और कनाडा के लोगों के रिश्ते बेहद पुराने हैं। किसी सरकार के बदलने से ये संबंध खत्म नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के कई अवसर मौजूद हैं।
ट्रंप से बातचीत के तरीके पर भी कार्नी ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि बातचीत सीधी और स्पष्ट होनी चाहिए। अपने हितों और बुनियादी शर्तों पर मजबूती से खड़ा रहना जरूरी है। साथ ही सम्मान बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।
जब उनसे पूछा गया कि यूरोप से नजदीकी पर ट्रंप नाराज होंगे या नहीं, उन्होंने चिंता नहीं जताई। कार्नी ने कहा कि कनाडा पहले से व्यापारिक दबाव का सामना कर रहा है। उनके अनुसार, अमेरिका ने कनाडा के खिलाफ कई व्यापारिक कदम उठाए हैं। कनाडा मानता है कि इनमें से कुछ कदम मौजूदा व्यापार समझौते के अनुरूप नहीं हैं।
कार्नी ने यूरोप के साथ बातचीत को सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह किसी देश के खिलाफ नहीं है। इसका उद्देश्य साझा चुनौतियों का मिलकर सामना करना है। कनाडा अब अपनी आर्थिक और रणनीतिक निर्भरता कम करना चाहता है। आने वाले महीनों में इस नई साझेदारी का स्वरूप स्पष्ट होगा।
