मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 भर्ती का मामला फिर चर्चा में है। 147 मेरिट होल्डर अभ्यर्थियों की नियुक्ति अब कानूनी राय पर निर्भर है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस मामले में महाधिवक्ता से अभिमत मांगा है। विभाग ने इसे विवादित मामला मानते हुए कानूनी सलाह मांगी है। अब महाधिवक्ता की राय के बाद ही आगे का फैसला होगा।

मामले में करीब तीन महीने से विवाद चल रहा है। अभ्यर्थी लगातार नियुक्ति आदेश जारी करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे चयन प्रक्रिया में मेरिट सूची तक पहुंचे हैं। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति और जॉइनिंग नहीं मिल रही है। इससे चयनित अभ्यर्थियों के सामने भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी है।

दरअसल, प्राथमिक शिक्षक वर्ग-3 की भर्ती परीक्षा वर्ष 2025 में हुई थी। यह परीक्षा कर्मचारी चयन मंडल यानी ईएसबी के माध्यम से आयोजित हुई थी। भर्ती की पात्रता को लेकर विभाग और अभ्यर्थियों के बीच विवाद है। विभाग ने विज्ञापन की अंतिम तारीख तक डीएलएड डिग्री अनिवार्य बताई। इसी आधार पर कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से रोक दिया गया। उनकी डीएलएड डिग्री विज्ञापन की अंतिम तारीख के बाद पूरी हुई थी। हालांकि, उनकी डिग्री परीक्षा परिणाम आने से पहले पूरी हो चुकी थी।

अभ्यर्थियों का दावा है कि भर्ती में ऐसी शर्त स्पष्ट नहीं थी। इसी मुद्दे को लेकर वे लगातार अधिकारियों से जवाब मांग रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने भी आश्वासन दिया था। लेकिन नियमों और कानूनी विवाद के कारण निर्णय नहीं हो सका। अब विभाग ने मामले को महाधिवक्ता के पास भेजा है।

गुरुवार को भोपाल के बोर्ड ऑफिस चौराहे पर अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद मंत्री के निर्देश पर विभाग ने अभिमत मांगा। विभाग ने पूरे मामले की परिस्थितियां महाधिवक्ता के सामने रखी हैं। उनसे पूछा गया है कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जा सकती है या नहीं। यदि राय नियुक्ति के पक्ष में आती है, तो आदेश जारी हो सकते हैं। इससे करीब 147 अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, विपरीत राय आने पर पुराना फैसला कायम रह सकता है।

विभाग के सामने एक और महत्वपूर्ण सवाल भी मौजूद है। यदि इन 147 अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलती है, तो अन्य दावे भी उठ सकते हैं। भर्ती के हजारों दूसरे अभ्यर्थी भी समान आधार पर मांग कर सकते हैं। इससे विभाग के सामने नया कानूनी और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो सकता है। इसी आशंका के चलते विभाग कानूनी राय को महत्वपूर्ण मान रहा है।

इस बीच अभ्यर्थियों का आंदोलन भी लगातार जारी है। दो दिन पहले उन्होंने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर चक्काजाम किया था। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी सड़क पर बैठ गए थे। पुलिस ने उन्हें हटाने की कार्रवाई की थी। कुछ अभ्यर्थियों को कई घंटों तक थाने में रखा गया। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

अब अभ्यर्थियों ने अपना आंदोलन लोक शिक्षण संचालनालय यानी डीपीआई तक पहुंचाया है। वहां प्रदर्शनकारी शेड के नीचे बैठकर अपनी मांग उठा रहे हैं। मौसम की परेशानी के बावजूद अभ्यर्थी आंदोलन जारी रखे हुए हैं। प्रदर्शनकारी बलराम परमार ने विभाग से ठोस निर्णय की मांग की है। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश और जॉइनिंग की स्पष्ट तारीख चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने भर्ती नियमों के क्लॉज-49 पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि डीएलएड पात्रता को लेकर असमंजस बना हुआ है। इस विवाद ने चयनित उम्मीदवारों का भविष्य अधर में डाल दिया है। अभ्यर्थियों का सवाल है कि मेरिट में चयन के बाद इंतजार क्यों? वे चाहते हैं कि विभाग जल्द लिखित निर्णय जारी करे।

फिलहाल 147 अभ्यर्थियों की निगाहें महाधिवक्ता की राय पर टिकी हैं। विभाग की अगली कार्रवाई उसी कानूनी अभिमत से प्रभावित होगी। अब देखना होगा कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिलती है। या फिर यह विवाद आगे भी लंबा खिंचता है।

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