सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की कीमतों में बड़े अंतर पर सवाल उठाए। ₹2,700 की दवा का MRP ₹27,000 होने पर चिंता जताई।

सुप्रीम कोर्ट ने जीवनरक्षक दवाओं, खासकर कैंसर की दवाओं की कीमत (Cancer Drug Price) में भारी अंतर को लेकर गंभीर चिंता जताई है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने ऐसे मामले की सुनवाई हुई, जिसमें एक कैंसर की दवा का Price to Retailer (PTR) करीब ₹2,700 बताया गया, जबकि उसका Maximum Retail Price (MRP) ₹27,000 था।

कोर्ट ने इस दस गुना अंतर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जीवनरक्षक और जरूरी दवाओं की कीमतें इस तरह तय करने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। पिछली सुनवाई में जस्टिस संदीप मेहता ने इस तरह के अंतर को मरीजों के साथ “दिनदहाड़े डकैती” बताया था।

एक नजर में

PTR:करीब ₹2,700 MRP: करीब ₹27,000 अंतर: लगभग 10 गुना मामला: जरूरी और जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण अगली सुनवाई: 12 अक्टूबर 2026

PTR और MRP के अंतर पर कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने दवा की रिटेल कीमत (Retail Drug Price) और उस कीमत के बीच के अंतर पर सवाल उठाया, जिस कीमत पर दवा रिटेलर तक पहुंचती है। कोर्ट के सामने यह सवाल था कि अगर किसी दवा की कीमत रिटेलर के लिए करीब ₹2,700 है, तो वही दवा मरीज के लिए ₹27,000 के MRP पर क्यों उपलब्ध हो रही है।

29 सितंबर की सुनवाई में बेंच ने यह भी सवाल उठाया कि जरूरी और गैर-जरूरी दवाओं के लिए अलग-अलग कीमत नियंत्रण व्यवस्था क्यों होनी चाहिए। कोर्ट ने सभी दवाओं पर एक समान मार्जिन सीमा की संभावना पर भी सवाल किया।

निजी अस्पतालों और मरीजों के खर्च पर भी सवाल

29 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निजी अस्पतालों में दवाओं की बिक्री और कीमतों को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्ट के मुताबिक, बेंच ने ऐसी स्थिति का उल्लेख किया जिसमें अस्पताल में भर्ती मरीजों से अस्पताल की अपनी फार्मेसी से दवाएं खरीदने की अपेक्षा की जाती है, जबकि बाहर से दवा लाने पर इलाज की गारंटी को लेकर समस्या खड़ी हो सकती है।

कोर्ट ने सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के संदर्भ में भी सवाल उठाया कि यदि किसी महंगी MRP पर दवा की कीमत की प्रतिपूर्ति सरकारी योजना के तहत होती है, तो उसका आर्थिक बोझ अंततः सरकारी खजाने और करदाताओं पर पड़ सकता है।

DPCO 2013 और गैर-सूचीबद्ध दवाओं का मुद्दा

यह मामला ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर, 2013 (Drug Price Control Order 2013) से जुड़े व्यापक सवालों पर भी केंद्रित है। याचिकाकर्ता किशन चंद जैन की याचिका में अनिवार्य रूप से जेनेरिक दवाएं लिखने, गैर-सूचीबद्ध दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने और मेडिकल डिवाइस की कीमतों पर नियंत्रण की मांग की गई है।

याचिका में यह मुद्दा उठाया गया है कि DPCO के तहत सूचीबद्ध दवाओं के लिए कीमत नियंत्रण की व्यवस्था है, जबकि बड़ी संख्या में गैर-सूचीबद्ध दवाओं की शुरुआती कीमत तय करने को लेकर अलग व्यवस्था है।

रोसुवास की कीमत का उदाहरण

सुनवाई के दौरान बेंच ने कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवा के उदाहरण से भी कीमतों में अंतर को समझाया। कोर्ट के सामने रोसुवास की एक स्ट्रिप की कीमत करीब ₹214 बताए जाने का उल्लेख हुआ। वहीं, रोसुवास के साथ एस्पिरिन का संयोजन होने पर उसकी कीमत करीब ₹70 होने का उदाहरण दिया गया।

कोर्ट ने इस अंतर पर सवाल उठाते हुए कहा कि सामान्य तौर पर संयोजन वाली दवा की कीमत अधिक होने की उम्मीद की जा सकती है, फिर भी यहां उलटा अंतर दिखाई देता है।

फार्मा कंपनियों की ओर से क्या कहा गया?

इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि दवाओं के MRP और रिटेल कीमत के बीच दिखाई देने वाला पूरा मार्जिन जरूरी नहीं कि दवा निर्माता के पास ही जाता हो। उन्होंने दवाओं की कीमत की पूरी श्रृंखला—निर्माता से स्टॉकिस्ट और फिर रिटेलर तक—की जांच करने की जरूरत बताई।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार की ओर से सुनवाई में कहा गया कि सरकार सस्ती और लोगों की पहुंच में दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार ने सुधार की गुंजाइश पर विचार करने की बात कही और प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana) का भी उल्लेख किया।

29 सितंबर की सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से मामले से जुड़े मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के लिए समय मांगा गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 को तय की।

आगे क्या होगा?

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने दवाओं की कीमतों को लेकर कोई अंतिम व्यवस्था लागू नहीं की है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस विषय पर विचार करने और संबंधित पक्षों के साथ चर्चा के लिए समय दिया है।

इस मामले में आगे की सुनवाई में यह महत्वपूर्ण होगा कि गैर-सूचीबद्ध दवाओं की कीमत तय करने, PTR और MRP के बीच अंतर तथा दवाओं और मेडिकल डिवाइस पर संभावित मूल्य नियंत्रण को लेकर सरकार और अन्य पक्ष क्या प्रस्ताव रखते हैं।

By Rahul Singh

पत्रकारिता मेरा जुनून है। सच को सामने लाना मेरा उद्देश्य।

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