ममता बनर्जी गुट ने सोमवार को नई पार्टी ‘ममता टीएमसी’ का अस्थायी नया लोगो ‘फुटबॉल खेलता खिलाड़ी’ लॉन्च किया। इसके पहले यह चुनाव चिन्ह राजा भैया की पार्टी जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) और तेलंगाना की युगा तुलसी पार्टी को भी मिल चुका था।
TMC में टूट के बाद 17 सितंबर को चुनाव आयोग ने TMC का ओरिजनल नाम और ‘दो फूल-घास’ सिंबल फ्रीज कर दिया था। इसके बाद ममता और बागी गुट अरूप रॉय को नई पहचान मिली। अरूप गुट को ‘डेमोक्रेटिक टीएमसी’ और ‘लिफाफा’ सिंबल दिया गया है। दोनों गुट 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव नई पहचान के साथ लड़ रहे हैं।
नई पहचान की पहली सीधी चुनावी परीक्षा रेजीनगर सीट पर होगी। यहां दोनों तृणमूल गुट आमने-सामने हैं, जबकि नंदीग्राम में ममता गुट ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है।
नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनाव से नाम वापस ले लिया था।
इसके बाद बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन दिया। बाद में 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े मामलों में प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया।
पूर्वी मेदिनीपुर के खेजुरी पुलिस स्टेशन में दर्ज मामलों के सिलसिले में कांग्रेस के नंदीग्राम उम्मीदवार मिलन प्रधान को 5 अक्टूबर तक जेल भेज दिया गया है।
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के पुराने नाम और सिंबल फ्रीज करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उनकी याचिका पर तुरंत सुनवाई की तारीख तय करने पर सहमति जताई। विरोधी पक्ष को भी अपनी दलील रखने का मौका मिलेगा।
यह कानूनी लड़ाई आगे चलकर पार्टी के मूल नाम और सिंबल का फैसला कर सकती है। हालांकि, इस फैसले का इंतजार किए बिना राजनीतिक अभियान चलाना शुरू कर दिया गया है।
